TANHAAI ||Inspirational short story ||2020


 
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"Tanhaai ki chaadar se lipat kar ab raaton ko nind nahi aati, guzar jaati hai har raat kisi ko yaad karte karte "


न्यूज़ पेपर में एक ऐड छापा था, एक घर का एड्रेस  लिखा था और साथ ही लिखा था ये घर बेचना है अगर कोई खरीदार हो तो दिए गए एड्रेस में आकर पूरी जानकारी हासिल करे. जब ये खबर एक प्रॉपर्टी डीलर ने पढ़ी तो उसने अपने साथ एक कस्टमर जिसको घर चाहिए था ले कर दिए गए एड्रेस में पहुँच गया, दरवाजा खट  खटाने  पर एक बूढ़े बाबा जी दरवाजा खोला और बहुत मोहब्बत और इज़्ज़त के साथ सभी लोग को घर के ड्राइंग रूम में बैठाया, थोड़ी ही देर में एक बूढी अम्मा एक ट्राली में चाय, बिस्कुट, मिठाई कुछ नमकीन सजाये मेहमानो के सामने ला कर रख दिए.

प्रॉपर्टी डीलर ने कहा बाबा  जी हम तो  बस  घर देखने आये है ये सब तक्कल्लुफ़ की कोई ज़रुरत नहीं थी. बाबा जी ने मुस्कुराते हुए कहा बेटा सब लोग अपने अपने नसीब का खाते है इसमें मेरी कोई बड़ाई नहीं है.

फिर चाय पिने के लिए बाबा जी ने मेहमानो को इशारा किया, सभी लोग चाय बिस्कुट वगैरा खाने लागे थोड़ी इधर उधर की बातें होने लगी, करीब एक घंटा गुज़र गया टाइम देखते हुए डीलर ने कहा बाबाजी बहुत देर हो गई है हमें कहीं और भी जाना है आप घर जल्दी से हमें दिखा दे,


ये सुन कर बूढ़ा बाबा उठा और मेहमानो को घर का हर एक कमरा हर एक कोना बहुत मोहब्बत के साथ दिखाने लगा, बाबा जी घर की हर एक चीज़ को इतनी बारीकी से बता रहे थे जिससे साफ़ पता चल रहा था की इस घर से बाबा जी को कितना लगाओ है. घर सब लोगों को पसंद आया अब बात कीमत तये करने की आई बाबा जी ने घर की कीमत ७० लाख बताया जब की वो घर मुश्किल से ४० लाख का भी नहीं होगा. कीमत सुन कर डीलर बोलने लगा बाबा जी अच्छा तरीक़ा ढूंढा है खिला पीला कर चुना लगाने का, इस घर की दो गुना कीमत बता रहे हो आप. ४० लाख भी बहुत जयादा है आप ७० बता रहे हो. डीलर के समझाने पर भी बाबा जी अपने बताये दाम पर ही आड़े रहे, डीलर और बाकी लोग थोड़ा नाराज़ हो कर वहां से वापिस चले गए.

कुछ महीने बाद फिर वही ऐड उसी घर का उसी डीलर ने पेपर में देखा, वो सोचने लगा अभी तक बाबा जी का घर नहीं बिका है अब अकाल ठिकाने आ गई होगी ज़रूर इस बार घर की कीमत काम कर दिए होंगे.

वो दूसरे ही दिन एक दूसरे कस्टमर के साथ बाबा जी के घर पहुंचा, बिलकुल पहले की तरह बाबा जी ने बड़ी ही इज़्ज़त और मोहब्बत के साथ सभी मेहमानों को बैठाया, 

फिर से वही बूढी अम्मा छाए बिस्कुट नमकीन से सजी ट्राली ले कर  आ गई, डीलर ने कहा क्यों आप इतना मेहमान नवाज़ी करते है हम तो बस घर देखने आये है, बाबा जी मुस्कुराते हुए फिर वही कह पड़े की,  बेटा सब लोग अपने अपने नसीब का खाता  है,आप लोग छाए लीजिये. आज फिर इधर उधर की बात करते १ घंटा गुज़र गया डीलर ने कहा बाबा जी मैं घर देख चूका हूँ मगर इन लोगों को देखना है आप इनको घर दिखा दीजिये, बड़ी ही मोहब्बत के साथ बाबा जी ने घर का हर एक कोना दिखाया, डीलर मन ही मन में सोच रहा था इस बार ४० लाख से भी कम में दाम तये करूँगा, लेकिन इस बार भी बाबा जी ७० से निचे आने को तैयार न हुए, डीलर बहुत गुस्से में इस बार भी खाली हाथ ही वापिस चला गया. 

एक साल गुज़र गए डीलर के एक दोस्त जो खुद भी प्रॉपर्टी डीलिंग का ही काम करता था उसेने फ़ोन कर के डीलर को कहा की एक घर बिकाऊ है मैं देखने जा रहा हूँ तुम भी मेरे साथ चलो दोनों मिल कर देख आते है, डीलर मान गया दोस्त ने उसी बाबा जी के घर डीलर को ले कर गया, घर को देखते ही डीलर बोल पड़ा, अरे यार मैं यहाँ दो बार पहले भी आ चूका हूँ एक पागल बूढ़ा बूढी की जोड़ी रहती है यहाँ, सिर्फ खिला पीला कर वापिस भेज देते है ये लोग, जो इस घर का दाम है उससे दो गुना जयादा बताते है और कम करने को बिलकुल भी तैयार नहीं होते, यहाँ जाने से बस टाइम बर्बाद होगा और कुछ नहीं. दोस्त ने कहा चलो  इस बार पूछ ही लेते है इनको ये घर बेचना है भी या नहीं क्यों पेपर में ऐड देते रहते है.

दरवाजा बाबा जी ने ही खोला और डीलर को देखते ही गले लगा लिया, ऐसे अंदर ले कर गए जैसे उनका कोई अपना रिश्तेदार आया है.

फिर से वही छाए, बिस्कुट सब बूढी अम्मा ले कर आ गई.

डीलर ने कहा मैं कुछ भी नहीं खाऊंगा आप मुझे सच सच बताये आपको ये घर बेचना है या नहीं, एक साल से आप पेपर में ऐड दे रहे है और अभी तक घर नहीं बेचा क्यों?

बाबा जी भीगी आंखों और कपकपाती होंठ से कहने लगे, बेटा मुझे ये घर बेचना नहीं है.

मैं और मेरी बीवी बहुत बूढ़े हो गए है, हमारे ३ बेटे है पर वो सब हिंदुस्तान से बहार रहते है किसी को हम से मिलने आने की फूरसत नहीं है, सब अपने काम में बिजी है बस महीने में कुछ पैसे भेज देते है और सोचते है उनका फ़र्ज़ पूरा हो गया.. 

बेटा हम दोनों तन्हाई भरी जिंदगी गुज़ार कर थक गए थे इसलिए हमने मिलकर ये तरकीब निकाली की घर देखने के लिए जब लोग आएंगे तो उनकी मेहमान नवाज़ी कर के और कुछ देर उनसे  बातें कर के हमारा दिल बहलेगा,  इसलिए हम घर की कीमत इतना जयादा बताते की कोई खरीदे ही नहीं बस हम अपना अकेला पन दूर करने के लिए ये ऐड पेपर में देते रहते है, ये कहते कहते बाबा जी रोने लगे और अम्मा भी रोने लगी इन दोनों की बात सुन कर और रोते हुए देख कर डीलर और उसके दोस्त की आँखों में भी आंसू आ गए.


डीलर और उसके दोस्त ने बाबा जी से  वादह किया की वो हर दिन उनके घर आ कर कुछ वक़्त उनके साथ गुज़ारेंगे. जो डीलर बाबा जी को पागल कह रहा था अब वो बेटे की तरह बाबा जी का ख्याल रखने लगा, दोनों दोस्त हर दिन अपने बिजी टाइम से कुछ वक़्त निकाल कर बाबा और अम्मा से मिलने जाने लगे, अम्मा भी हर वो पकवान उनके लिए बना कर रखती जो वो सालों  पहले बनाना छोड़ चुकी थी, दोनों बेसब्री से हर दिन डीलर और उसके दोस्त के आने का इन्तेज़ार करते, दोनों दोस्तों के आने से  बाबा जी और अम्मा जी की तन्हाई भरी ज़िन्दगी में खुशिओं के बाहार आ गए. 

Moral of this inspirational short story is:-


बुढ़ापे में आपके माँ बाप को आपके पैसों की नहीं बल्कि आप की ज़रुरत होती है, औलाद की ज़रुरत होती है, हर औलाद को चाहिए की अपनी बिजी टाइम से कुछ वक़्त आपने माँ - बाप के लिए भी निकाले.

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"Aye meri aulaad, wahan se tanhaai ne jakda hai zindagi hamaari, jahan se saath tumne choda tha"




अनमोल है वो औलाद जो अपने माँ- बाप की कदर करते है, 

वरना इंसानियत के खातिर कभी कभी गैर भी फ़िक्र कर लिया करते है.

दौलत भी मिलेगी इज़्ज़त भी मिलेगी, करो माँ- बाप की खिदमत तो ज़न्नत भी मिलेगी. 

किसी ने रोजा रखा , किसी ने उपवास रखा.. कुबूल उसका हुआ, जिसने "माँ - बाप" को अपने पास रखा..  


                                                                                                                                           


News paper me ek add chapa tha, ek ghar ka address  likha tha aur saath hi likha tha ye ghar bechne ke liye hai agar koi kharidaar ho to diye gaye address mein aakar poori jaanakari haasil kare. jab ye khabar ek property dealer  ne padhi to usne apne saath ek customer jisko ghar chaahiye tha le kar diye gaye address mein pahunch gaya, darwaza khat  khataane  par ek budhe baaba ji ne darwaza khola, aur bahut mohabbat aur izzat ke saath sabhi log ko ghar ke drawing room mein baithaaya, thodi hi der mein ek budhi amma ek trolley mein chaaye, biskut, mithai kuch namakeen sajaaye mehamaano ke saamane la kar rakh die.

  Dealer ne kaha baba ji hum to bas  ghar dekhne aaye hai, ye sab takkalluf ki koi zarurat nahin thi. Baba ji ne muskuraate hue kaha  beta sab log apane apne naseeb ka khaate hai ismen meri koi badai nahin hai.fir chaaye pine ke liye baaba ji ne mehamaano ko ishaara kiya, sabhi log chaaye biskut sab khaane laage, thodi idhar udhar ki baaten hone lagi, kareeb ek ghanta guzar gaya time dekhte hue dealer ne kaha baba ji, bahut der ho gai hai hamen kahin aur bhi jaana hai aap ghar jaldi se hamen dikha dijye.

Ye sun kar budha baba uthe aur mehamaano ko ghar ka har ek kamra har ek kona bahut mohabbat ke saath dikhaane laga baba ji ghar ki har ek cheez ko itani baariki se bata rahe the jisse saaf pata chal raha tha ki is  ghar se baba ji ko kitana lagao hai, ghar sab logon ko pasand aaya ab baat keemat taye karne ki aai baba ji ne ghar ki keemat 70 laakh bataye, jab ki wo ghar mushkil se 40 laakh ka bhi

nahin hoga. keemat sun kar dealer bolne laga baba ji achchha tareeqa dhoondha hai khila peela kar chuna lagaane ka, is ghar ki do guna keemat  bata rahe ho aap. 40 laakh bhi is ghar ke liye bahut jayada hai aur aap to 70 laakh bata rahe ho, aap 70 bata rahe ho. dealer ke samajhaane par bhi baaba ji apane bataye daam par hi aade rahe, dealer aur baaki log thoda naaraaz ho kar waha se waapis khaali haath chale gaye.

kuch maheene baad phir wahi add usi ghar ka usi dealer ne pepar mein dekha, wo sochane laga abhi tak baaba jee ka ghar nahin bika hai ab akaal thikaane aa gai hogi zaroor is baar ghar ki keemat kam kar diye honge. Dusre hi din dealer ek dusre customer  ke saath baaba ji  ke ghar pahuncha, bilkul pehle ki hi  tarah baaba ji ne badi hi izzat aur mohabbat ke saath sabhi mehamaanon ko baithaaya, 

phir se wahi budhi amma chaye biskut namkeen se saji trolley le kar  aa gai, dealer ne kaha kyun aap itana mehamaan nawaazee karte hai ham to bas ghar dekhne aaye hai, baaba ji muskuraate hue fir wahi baat kahne lage ki, sab apne apne naseeb ka khaata  hai beta, aap log chaye lijiye, aaj phir idhar udhar ki baat karte 1 ghanta guzar gaya dealer ne kaha baaba ji main ghar dekh chuka hoon magar in logon ko dekhna hai aap inko ghar dikha dijiye, bade hi mohabbat ke sath baba ji ne ghar ka har ek kona dikhaaya, dealer man hi man mein soch raha tha is baar 40 laakh se bhi kam mein daam taye karoonga, lekin is baar bhi baba ji  70 laakh  se niche aane ko taiyaar na hue, dealer bahut gusse mein is baar bhi khali haath hi waapis chala gaya. 


ek saal guzar gaya dealer  ka ek dost jo khud bhi property dealing ka hi kaam karta tha usne phone kar ke dealer ko kaha ki, ek ghar bikaoo hai main dekhane ja raha hoon tum bhi mere saath chalo dono mil kar dekh aate hai, dealer maan gaya,. dost ne usi baba ji ke ghar dealer ko le kar gaya,  ghar ko dekhte hi dealer bol pada, are yaar main yahaan do baar pahle bhi aa chooka hoon ek pagal budha budhi ki jodi rehti hai yahaan, sirf khila peela kar wapis bhej dete hai ye log, jo is ghar ki keemat hai usse do guna jayaada bataate hai aur kam karne ko bilakul bhi taiyaar nahin hote, yahan jaane se bas time barbaad hoga aur kuch nahin. Dost ne kaha chalo  is baar puch hi lete hai inko ye ghar bechna hai bhi ya nahin, kyun papar mein add dete rehte hai.. Is baar fir

darwaja  baba ji ne hi khola aur dealer ko dekhte hi gale laga liya, aise andar le kar gaye jaise unka koi apana rishtedaar aaya hai. Fir wahi budhi amma  chaye wali trolley le kar aa gai, dealer ne kaha main kuch bhi nahin khaoonga aap mujhe sach sach bataaye aapko ye ghar bechna hai ya nahin, ek saal se aap paper mein add de rahe hai aur abhi tak ghar nahin becha kyun?

Baba ji bheegi aankhon aur kapkapaate honth se kehne lage, beta mujhe ye ghar bechna nahin hai.

Main or meri biwi bahut budhe ho gaye hai, 

hamaare 3 bete hai par wo sab hindustaan se bahaar rahate hai kisi ko hum se milne aane ki fursat nahin hai, sab apne kaam mein busy hai bas mahine mein kuch paise bhej dete hai aur sochte hai unka farz poora ho gaya.. 

Beta hum dono tanhaai bhari zindagi guzaar kar thak gaye the isliye hamne milkar ye tarqeeb nikaali ki, ghar dekhne ke liye jab log aaenge to unki mehamaan nawaji  kar ke aur kuch der unse  baaten kar ke hamaara dil bahalega,  isliye hum ghar ki keemat itana jayaada bataate ki koi khareede hi nahi, bus hum dono apna akelapan door karne ke liye paper me add daalte rehte hai, ye kehte hue baba ji aur amma ji rone lage, dono ko rota hua dekh dealer aur uske dost ki bhi aankhon me aansoo aa gaye. 

Moral of this inspirational short story is :-

Budhaape me aapke maa-baap ko aapke paison ki nahin balki aap ki zarurat hoti hai, aulaad ki zarurat hoti hai, har aulaad ko chahiye ki apani busy time se kuch waqt apne maa - baap ke liye bhi nikaale.


Anmol hai wo aulaad jo apne Maa- Baap ki qadar karte hai, 

Warna insaaniyat ke khaatir safar-e-zindagi me kabhi to sath gair bhi de diya karte hai. 


Daulat bhi milegi, Izzat bhi milegi, karo maa- baap ki khidmat to Jannat bhi milegi. 


Kisi ne roja rakha , kisi ne upawaas rakha.. kubool uska hua, jisne "maa - baap" ko apne paas rakha... 








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